life poetry


हासिल-ए-कुन_Hindi Poetry_2019

ज़िन्दगी के बेहिसाब सिक्कों से, मैंने अपने हिसाब के सिक्के चुन लिए इन हिसाबी सिक्कों की कीमत बेहिसाब करने, न जाने मैं…

अक्टू॰ 1, 2019

अभी-अभी/hindi sensitive poems _Ankit AKP

अभी-अभी तो वह रेंगा था लोगों ने उसे कुचलना शुरू कर दिया; उसने लोगों से अपनी जान बचानी चाही तो लोगों ने उसे हमला समझ …

सित॰ 8, 2018