कविता -"सूरज : जिन्दगी की पहचान"/Suraj : Jindagi ki Pehchan_Ankit AKP
"सुबह देखी थी जो पहली किरन ढलती शाम की अंतिम हो गई लोहित था, लोहित ही है एक आने की तो एक जाने की बस यही वो…
"सुबह देखी थी जो पहली किरन ढलती शाम की अंतिम हो गई लोहित था, लोहित ही है एक आने की तो एक जाने की बस यही वो…