"जब चौराहे पर खड़ा था मैं"_Hindi Poetry 2019_Ankit AKP
"चौराहे पर खड़ा था मैं, आस लगाए लोगों की; चाहता था कोई, सुने मेरी पुकार मुझे क्या तकलीफ थी, पूछे कोई; मुझे आस …
"चौराहे पर खड़ा था मैं, आस लगाए लोगों की; चाहता था कोई, सुने मेरी पुकार मुझे क्या तकलीफ थी, पूछे कोई; मुझे आस …
ये जिन्दगी हमसे, नाराज बैठी है ये जिन्दगी हमसे, उस पार बैठी है; ये जिन्दगी है कहीं हंसने, तो कहीं रोने बैठी है क…
झूठ भी है, सच भी है बस फर्क इतना सा है कि झूठ सच को छिपाता है, और सच झूठ को दिखाता है ! और हाँ......हर झूठ के पीछे एक सच…
पता नहीं इंसान से तभी गलतियाँ क्यों होने लगती हैं, जब वह समझदार होने लगता है !!!
वक़्त निकल गया खुद को बदलने का इसलिए अब वक़्त नहीं, खुद को बदलूँगा
"कास कुछ ऐसा हो जाए, मेरी जिन्दगी की सारी मुश्किलें दूर हो जाए कास कुछ ऐसा हो जाए, मेरी जिन्दगी के हर जख्म दूर हो …