जिन्दगी हमसे नाराज बैठी है / Zindagi Humse Naraj Baithi Hai_Hindi Poetry_Ankit AKP
ये जिन्दगी हमसे, नाराज बैठी है ये जिन्दगी हमसे, उस पार बैठी है; ये जिन्दगी है कहीं हंसने, तो कहीं रोने बैठी है क…
ये जिन्दगी हमसे, नाराज बैठी है ये जिन्दगी हमसे, उस पार बैठी है; ये जिन्दगी है कहीं हंसने, तो कहीं रोने बैठी है क…
"अपने आप से यह कभी मत कहो कि मुझे सब कुछ नहीं आता है, वरना कुछ करने की चाहत खत्म हो जाती है और ना ही कभी …
"जरूरतें कम हैं, ख्वाहिशें ज्यादा हैं वरना इंसान तो कैसे भी जी लेता है !"
मेहनत भी मेहनत,मेंहदी की तरह होती है ना मेंहदी की तरह होती है, जैसे मेंहदी लगाने के बाद हम चाहे कि मेंहदी तुरन्त रंग …
सही है, सब कुछ सही है सिवाय गलत के..... अब गलत को गलत ढंग से गलत कहें या सही ढंग से गलत कहें, लेकिन गलत तो गलत है उसमें क…