hindi kavita


"आईना - शक्ल दिखाने आए हो?" (कविता)

"शक्ल दिखाने आए हो  या देखने आए हो  या मिले हैं जो निशान जख़्म के  उन्हीं को अंदर तक झाँकने आए हो  या तुम्हारे नाम के भ…

जून 17, 2020

कविता - "सोच"

"अपनी बातों के अल्हड़पन में वो अपने जज्बातों के नन्हेंपन से रूबरू कराती है अपनी हर इक अदा में वो बा'अदब मासूमि…

मई 7, 2020
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"मेरी जिन्दगी का किस्सा /Meri Zindagi Ka Kissa"_Hindi poetry

कुछ रुका कुछ चला सा हूँ मत पूछो किस कदर खला सा हूँ अपने और अपनों के दरमियान फंसा सा हूँ यूँ समझो अपने ही पंजों में क…

जन॰ 18, 2020

बाजार सज गए हैं_Hindi Poetry Diwali Par_Ankit AKP

बाजार सज गए हैं दिवाली है, सब बस इसी में रम गए हैं बाजार सज गए हैं! घर की दहलीज़ की दुकानें भी, दहलीज़ पार कर बाहर …

अक्टू॰ 14, 2019

हासिल-ए-कुन_Hindi Poetry_2019

ज़िन्दगी के बेहिसाब सिक्कों से, मैंने अपने हिसाब के सिक्के चुन लिए इन हिसाबी सिक्कों की कीमत बेहिसाब करने, न जाने मैं…

अक्टू॰ 1, 2019

Hindi Poetry "ज़िन्दगी के रंगरे़ज / Zindagi Ke Rangrez"_My Thoughts

मुस्कान की तीली से चलो थोड़ी खुशी की चिंगारी जला लेने दो ; किसी को जलाना है मुझे जरा मेरे आसूँ छुपा लेने दो ; बेख़बर…

जुल॰ 18, 2019
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"दिल का दर्द" /"Dil Ka Dard" Latest Hindi Poetry 2019 _Ankit AKP

आजकल जो अन्दर मेरे रहता है देखो कुछ कहता है या... बस चुपचाप रहता है कितनी भी खामोशी हो या कितना ही शोर देखो कुछ फर्क…

मार्च 10, 2019

"जब चौराहे पर खड़ा था मैं"_Hindi Poetry 2019_Ankit AKP

"चौराहे पर खड़ा था मैं, आस लगाए लोगों की; चाहता था कोई, सुने मेरी पुकार मुझे क्या तकलीफ थी, पूछे कोई; मुझे आस …

फ़र॰ 7, 2019

जिन्दगी हमसे नाराज बैठी है / Zindagi Humse Naraj Baithi Hai_Hindi Poetry_Ankit AKP

ये जिन्दगी हमसे, नाराज बैठी है ये जिन्दगी हमसे, उस पार बैठी है; ये जिन्दगी है कहीं हंसने, तो कहीं रोने बैठी है क…

दिस॰ 11, 2018
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कविता -"कैसे"/ Kaise_Hindi Poetry_Ankit AKP _2018

कविता शीर्षक - कैसे कैसे मैं खुद को बतलाऊँ कि क्या हूँ मैं  कैसे इस जहान में अपनी पहचान बनाऊँ मैं  कैसे उस मंजिल तक…

दिस॰ 9, 2018