बाजार सज गए हैं_Hindi Poetry Diwali Par_Ankit AKP
बाजार सज गए हैं दिवाली है, सब बस इसी में रम गए हैं बाजार सज गए हैं! घर की दहलीज़ की दुकानें भी, दहलीज़ पार कर बाहर …
बाजार सज गए हैं दिवाली है, सब बस इसी में रम गए हैं बाजार सज गए हैं! घर की दहलीज़ की दुकानें भी, दहलीज़ पार कर बाहर …