Love Poetry "वो, उसका मुखड़ा और मेरा इश्क / Woh, Uska Mukhda aur Mera Ishq"_2018_Ankit AKP
Woh, uska mukhda aur mera ishq आजकल वो जैसे मेरे, गीतों का सुर बांधती है गले में जैसे मेरे, सरस्वती बन विराजती है; …
Woh, uska mukhda aur mera ishq आजकल वो जैसे मेरे, गीतों का सुर बांधती है गले में जैसे मेरे, सरस्वती बन विराजती है; …
"वक़्त निकल गया खुद को बदलने का..... इसलिए अब खुद को नहीं, मेरा वक़्त बदलूंगा !"
मौसम के मिज़ाज में, सावन की बौछार पड़ी है एक धुंधला सा चेहरा है सामने, जो बारिश की की बूँदों के पार खड़ी है......