'हम'/Hum
"हम! बोलने में ही वजन जान पड़ता है,, हम...! है न? वैसे तो बहुत ही सामान्य शब्द है 'हम' पर इसके अंदर उतना ही …
"हम! बोलने में ही वजन जान पड़ता है,, हम...! है न? वैसे तो बहुत ही सामान्य शब्द है 'हम' पर इसके अंदर उतना ही …
"कभी -कभी होता है न कि करना कुछ और होता है, हो कुछ और जाता है,, ऐसे ही कुछ दिमाग के पैदल हो जाते हैं, और उसमें कैसी ना…
कुछ रुका कुछ चला सा हूँ मत पूछो किस कदर खला सा हूँ अपने और अपनों के दरमियान फंसा सा हूँ यूँ समझो अपने ही पंजों में क…
कब हुआ, कब न हुआ ये इश्क़ है, इसपे कब किसी का बस हुआ कभी नजरें मिलते - मिलाते, तो कभी मुस्कुराते ये इश्क़ यूँ ही नहीं …
भाग-1 "मौसम के मिजाज में" "मौसम के मिज़ाज में सावन की बौछार पड़ी है एक धुंधला सा चेहरा है सामने जो बा…
बाजार सज गए हैं दिवाली है, सब बस इसी में रम गए हैं बाजार सज गए हैं! घर की दहलीज़ की दुकानें भी, दहलीज़ पार कर बाहर …
शायद वह मोहब्बत की तहज़ीब जानता है इसलिए वह अपनी मोहब्बत का सज़दा करता है शायद मोहब्बत खुदाई है वह ये जानता है इसलिए …
ज़िन्दगी के बेहिसाब सिक्कों से, मैंने अपने हिसाब के सिक्के चुन लिए इन हिसाबी सिक्कों की कीमत बेहिसाब करने, न जाने मैं…
मुस्कान की तीली से चलो थोड़ी खुशी की चिंगारी जला लेने दो ; किसी को जलाना है मुझे जरा मेरे आसूँ छुपा लेने दो ; बेख़बर…
आज देखी वो दीवानगी, जो सर चढ़कर पागलपन हो गयी पागलपन इस हद तक, कि मोहब्बत से परे हो गयी मोहब्बत थी भी, कि नहीं क्या…